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संस्कृत के आदि कवि महर्षि वाल्मीकि सामाजिक समरसता व समानता के प्रतीक: अधिवक्ता चितरंजय पटेल • रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर NHRSJC (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष ने किया नमन शक्ति:हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाकाव्य ‘रामायण’ के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग विधि के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने महर्षि वाल्मीकि के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया। अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने महर्षि वाल्मीकि को भारतीय संस्कृति, साहित्य और सामाजिक जागरण का महान प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि प्राचीन भारत के एक महान ऋषि और संस्कृत साहित्य के आदि कवि थे। उन्होंने कालजयी महाकाव्य ‘रामायण’ की रचना कर भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा को जन-जन तक पहुँचाया। उनका यह अवदान सामाजिक समरसता की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक व प्रेरणादायी कदम है।

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